मां नर्मदा की परिक्रमा में गंदे नाले को पार करते थे परिक्रमावासी जन सहयोग से बन रही पुलिया

बड़वाह

मध्यप्रदेश के अमरकंठ से निकली मां नर्मदा एक ऐसी पवित्र नदी है जिसकी केवल विश्व की धरा पर 3 साल 3 महीने 13 दिन में 3 हजार किमी की पैदल परिक्रमा की जाती है।

इस पूरे परिक्रमा मार्ग में मात्र 200 मीटर का एक ऐसा भी नाले का रास्ता है जिसमे से परिक्रमावासियों को बहुत खराब स्थिति में पार करना पड़ता हैं।

यह रास्ता मध्यप्रदेश के बड़वाह नगर के बीच स्थित नागेश्वर मंदिर के पहले रहवासी क्षैत्र गवली मोहल्ले में स्थित है।
यहा मकानों के बीच ढाई फीट गली से निकल कर पडाली नदी को पार करना पड़ता है। लेकिन नदी अब गंदे नाले के रूप मे है।

हालाकि नागेश्वर मंदिर के आगे से पक्का मार्ग बना हुआ है,लेकिन नर्मदा पुराण में उल्लेखित है की नागेश्वर मंदिर में रेवा कुंड है,जिसे परिक्रमा वासी पार नहीं कर सकते।

परिक्रमा वासियों को बड़ी खराब स्थिति में प्रतिदिन इस गंदे पानी के नाले से पार होते हुए देख कर मां नर्मदा के प्रति आस्था रखने वाले नगर के कुछ श्रद्धालुओं को यह बढ़ा नागवार गुजरता था।इसके लिए शहर के कई अलग-अलग समाजसेवियों एवं संगठनों द्वारा जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक माध्यम से यहां पुलिया बनाने की मांग की गई। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजुद जब वह संभव ना हो सका तो स्थानीय लोगों ने जनसहयोग से यहां पुलिया बनाने के साथ मार्ग को दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया। ओर बीते कुछ दिनों पहले से शुरु हुए कार्य के बाद अब तक यहां पांच पिलरों का निर्माण किया जा रहा है।इसके साथ ही ऊबड़-खाबड़ रास्ते को भी ठीक करवाकर यहां सीढि़यों का निर्माण करवा दिया गया हैं।

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Sanjay Upadhyay

Journalist