नार्मदीय महिला मंडल की महिलाओं ने घर-घर जाकर गाए संजा के गीत,

लोक संस्कृति के पर्व को बचाने की पहल

बड़वाह—श्राद्ध पक्ष में मनाए जाने वाले लोक संस्कृति अनूठे संजा पर्व को मनाने के लिए कंवर कॉलोनी में सुषमा मोहन जोशी के घर पहुंचकर कार्यक्रम करने का संकल्प लिया। वह संकल्प पूरा हुआ प्रथम दिवस से आखरी दिवस

का समापन पितृ अमावस्या पर हो हुआ। इसके एक दिन पहले शुक्रवार शाम को नगर में इस पर्व धूमधाम से मनाया।नार्मदीय समाज महिला मंडल की महिलाओं ने संझा माता के सामूहिक भजन एवं पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया।

इसमें समाज की महिलाओं ने नार्मदीय

समाज के अलग-अलग घरों में गीत संझा माता के भजन गाए। साथ ही आरती भी की। साथ ही प्रसादी का वितरण भी किया। इस दौरान समाज की महिलाओं ने बताया कि श्राद्ध पक्ष के दौरान पहले गली-गली संझा माता के गीत गूंजते सुनाई पड़ते थे। घरों के बाहर गोबर, फुल, रंग-बिरंगी कागज से सुसज्जित आकृतियां भी नजर आती थी ।प्रतिदिन शाम को बालिकाओं, युवतियों और महिलाओं का समूह घर के बाहर संझाबाई के गीतों को एक साथ गाता था। लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे संझा पर्व मानाने की परम्परा समाप्त हो रही है। कभी घर-घरमनाई जाने वाला यह पर्व अब कुछ मोहल्लों तक ही सिमट कर रह गया है। वहीं आधुनिक पीढ़ी की रूचि भी इसमें धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन लोक संस्कृति के इस पर्व को फिर जीवंत करने के लिए नार्मदीय समाज की महिला मंडल ने संझा माता का सामूहिक पूजन शुरू किया।

जो श्राद्ध पक्ष शुरू होने के साथ अलग-अलग घरों में जाकर महिलाएं एक साथ संझा माता का पूजन करती है। आज अंतिम दिवस था। आज भी समाज की महिलाओं ने कंवर कॉलोनी बनाया है। ग्रुप की महिलाओं ने अपनी बहू-बेटियां एवं पोतियों को इस पर्व से परिचित कराने का संकल्प लेकर स्वयं ही इस पर्व को मनाना शुरू किया है।

भारती राजा शर्मा और ऋषिका विशाल बड़ोले के घर मनाया। अंत में आरती कर प्रसादी वितरण किया। कंवर कॉलोनी में सुषमा मोहन जोशी के घर पहुंचकर कार्यक्रम का समापन हुआ। इस कार्यक्रम में भारती शर्मा, मेघा चिंचे, प्रतिमा शर्मा, मनीषा चंद्रे, शालिनी पराशर, प्राची, कविता चंद्रे, सुषमाशर्मा, अर्पिता सुनीता, उपाध्याय, नंदिनी, माया श्रुति शर्मा, ऋषिका बड़ोले, प्रज्ञा गावशिंदे सहित समाज की सभी महिलाओं ने हिस्सा लिया।